लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट लीक हुई फिर उसे संसद में पेश भी किया गया. खूब शोर शराबा भी हुआ . २४ घंटे ताजा खबर देने वाली मीडिया में भी दो दिनों तक छाई रही पर इस हो-हल्ला में हम आम लोगो की आवाज तो दब ही गई. हमारे महंगाई के मुद्दे, किसानो के लिए समर्थन मूल्य की बात, और ऐसी कई तमाम मुद्दे जो आम लोगों की हीतो से सम्बंधित थे वे सब कही बाबरी मुद्दा रूपी बादलों के पीछे चले गए. मेरा मानना है की आम आदमी सिर्फ आम आदमी होता है.उसे तो पहले रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मुलभुत जरूरतें पूरी करनी होती हैं. यदि सड़क पे खड़े एक भूखे व्यक्ति से पूछा जाये की उसे क्या चाहिए तो वो मंदिर या मस्जिद नहीं खाना मांगेगा. एक आम मध्यम वर्गीय परिवार अपने घर की सुरक्षा, महंगाई पे लगाम, बिजली, सड़क, बेहतर शिक्षा और बेहतर शहरी व्यवस्था चाहता है न की जो हमारे नेता सोचते हैं. काश हमारे नेता मुद्दों को वरीयता जनता को ध्यान में रख कर देना सीख जाते बनिस्पत की अपने और अपने पार्टी के.
आखिर में वो ग़ालिब की बात भी याद आती है " आदमी को आदमी मय्यसर कहाँ"
जय हिंद !!
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